असली चेहरे / मनोज चौहान

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इलाके का जोशीला और स्वाभिमानी पहलवान शौर्यवीर सिंह युवा वर्ग के लिए मिसाल था l महज 27 बर्ष की उम्र में ही उसका पहलवानी के क्षेत्र में खासा नाम हो गया था l बड़े–बुजुर्ग उसे आशीष देते नहीं थकते l वह भी हमेशा सबको सम्मान देता और युवाओं को हमेशा पढ़ाई के साथ-2 खेलों में भी भाग लेने को प्रेरित करता था l समाज सेवा की भावना से ओत–प्रोत शौर्यवीर सिंह, सभी के कामों के लिए भाग–दौड़ करता फिरता l

एक बार ऐसे ही किसी काम के लिए शौर्यवीर सिंह अपने ही इलाके के मंत्री बने विधायक से मिलने उनके ऑफिस पहुंचा था l नेता जी ने पहले तो उसे तबज्जो नहीं दी, मगर बाद में उसे जानबूझ कर न पहचानने का उपक्रम करते हुए उसका परिचय पूछने लगे l पूरा दिन उसे बिठाये रखने के बाद भी नेता जी को अपने चहेतों के काम निपटाने से फुर्सत नहीं मिली l शाम होने पर उसे दुसरे दिन आने के लिए कहा गया l अगले दिन दोपहर को पहुंचे शौर्यवीर सिंह को फिर से इन्तजार करना पड़ा l

भोजन के बाद नेता जी ने सभी उपस्थित लोगों से पूछा "किसी का कोई काम तो नहीं है?" शौर्यवीर खड़ा होकर अपना काम बताने लगा l उसे एक ज़रूरतमंद युवा खिलाड़ी को अभ्यास हेतु जिम में जॉइन करवाने के लिए फ़ोन करवाना था l नेता जी बोले कि इस बक्त तो किसी समारोह में जाना हैं, अभी कुछ नहीं हो सकता l अपने ही इलाके के वहाँ उपस्थित चाटुकारों की टोली भी शौर्यवीर सिंह का साथ नहीं दे पायी l उसके भीतर विचारों का द्वन्द चल रहा था l बुझे हुये मन से वह लौट आया l उसे नेता और वहाँ उपस्थित चाटुकारों के असली चेहरे साफ़ दिखाई देने लगे थे!