केरल में बाढ़ का कहर, चिंता हर प्रहर / जयप्रकाश चौकसे

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केरल में बाढ़ का कहर, चिंता हर प्रहर
प्रकाशन तिथि : 22 अगस्त 2018


केरल में जन्मी कन्याएं प्राय: नर्स बनने का प्रशिक्षण लेती हैं और अनगिनत बीमारों की तीमारदारी करती हैं। केरल के कई युवा खाड़ी देशों में नौकरी करते हैं। ये सभी लोग केरल में आई बाढ़ से हुई तबाही से दुखी और स्तब्ध हैं तथा बाढ़ राहत कोष में धन भेज रहे हैं। वे तमाम आला अफसर दुखी रहते हैं, जिनकी पोस्टिंग ऐसे नगर में नहीं हुई, जहां कोई नदी बहती है। बाढ़ राहत कोष घपले के अवसर भी पैदा करते हैं। इस समय दस लाख लोग राहत शिविरों में भेजे गए हैं परंतु वहां क्या सुविधाएं हैं, इसकी जानकारी हमें नहीं है। दरअसल, नेताओं को स्वयं को अवाम के साथ रिश्तेदारी जोड़ने से उनका वोट बैंक मजबूत होता है। यह सिलसिला इस तरह शुरू हुआ कि हमारे पहले प्रधानमंत्री के साथ चाचा सम्बोधन जुड़ गया, जिसके लिए उन्होंने कोई प्रयास नहीं किया था। नेहरू युग के प्रतिनिधि फिल्मकार नेहरू को चाचा के संबोधन से पुकारते थे। राज कपूर ने नेहरूजी से मुलाकात की और बताया कि वे 'अब दिल्ली दूर नहीं' नामक फिल्म बनाना चाहते हैं जिसमें सुदूर गांव में जन्मा एक बच्चा अपने पिता को न्याय दिलाने के लिए दिल्ली पहुंचता है। राह में आई बाधाओं को पार करता है। राज कपूर ने नेहरू से जानना चाहा कि क्या फिल्म के अंतिम दृश्य की शूटिंग के लिए वे चंद घंटे का समय देंगे। नेहरू ने रजामंदी जाहिर की। राज कपूर ने फिल्म की शूटिंग की, जिसके संगीत के लिए शंकर-जयकिशन के सहायक दत्ताराम को अनुबंधित किया गया। उनका गीत 'चलो चलें मां, सपनों के गांव में, ममता की छांव में' अत्यंत मधुर बन पड़ा। जब क्लाइमैक्स के लिए समय मांगने पर राज कपूर दिल्ली पहुंचे तब उन्हें बताया गया कि मोरारजी देसाई ने आपत्ति उठाई है कि प्रधानमंत्री को किसी कथा-फिल्म की शूटिंग में भाग नहीं लेना चाहिए। बहरहाल, यही एकमात्र फिल्म है जो राज कपूर ने अनमने ढंग से पूरी की। याद आता है हरिशंकर परसाई का एक व्यंग्य। एक कलेक्टर अपनी पोस्टिंग से दुखी है कि नगर के पास कोई नदी नहीं बहती। उन्हें सलाह दी जाती है कि क्षेत्र में एक तालाब बनाने के नाम पर घपला कर लें। वह यही करता है। कुछ समय बाद उसका तबादला होता है तो नया अधिकारी उससे कहता है कि तालाब को खुदवाया ही नहीं गया। स्थानांतरित अफसर कहता है कि नया अधिकारी यह रपट बनाए कि उस तालाब का पानी पीने से लोग बीमार हो रहे हैं, अत: उसे बंद करना होगा। इस तरह वह तालाब पत्थरों से पाट दिया गया जो कभी खोदा ही नहीं गया था। घपलों के ईजाद में हमारा मुकाबला कोई नहीं कर सकता। जब 'हीना' की शूटिंग कुल्लू-मनाली में चल रही थी तब भारत का एक घोटाला सुर्खियों में था। नायिका जेबा बख्तियार ने कहा कि आपके विराट देश में इस घपले में उल्लेखित राशि के बराबर राशि का तो नमक पाकिस्तान में प्रतिदिन खाया जाता है। ज़ेबा ने बताया कि पाकिस्तान के कई भव्य बंगलों में बिजली की कीमत चुकाने में घपले होते हैं। पांच हजार की बिजली खपत का बिल महज पांच सौ रुपए आता है और इतनी ही रकम रिश्वत में दी जाती है। उसका कहना था कि घपलों के मामले में उनका देश पाकिस्तान किसी से कम नहीं है। केरल में बनी फिल्में प्राय: दो प्रकार की होती है। एक तो गहरी सामाजिक प्रतिबद्धता की महान फिल्में। दूसरे प्रकार में 'हर नाइट्स' की तरह की फिल्में हैं, जिसमें नायिका देह प्रदर्शन करती है। ज्ञातव्य है कि सलमान खान की फिल्म 'बॉडी गार्ड' भी केरल में बनी मोहम्मद भाई फिल्म से प्रेरित थी और उन्होंने मूल फिल्म के अधिकार ही नहीं खरीदे वरन उसी के निर्देशक को हिंदुस्तानी भाषा में बनी फिल्म का दायित्व सौंपा गया था। खाकसार ने इसके संवाद लिखे थे। मोहम्मद भाई का हिंदुस्तानी संस्करण बनाने में जितनी फिजूलखर्ची एक सप्ताह में की गई, उतने में केरल में एक फिल्म बन जाती है। हमारे यहां कम साधन वाले लोग किफायत करते हैं, क्योंकि फिजूलखर्ची को संपन्नता की पहचान बना लिया गया है। किफायत कंजूसी से अलग बात है। भारत में पहली वामपंथी सरकार केरल में ही बनी थी। चुनाव के माध्यम से वामपंथ की विजय एक विरल बात थी। इंदिरा गांधी ने उस सरकार को बर्खास्त किया था। जवाहर लाल नेहरू इस निर्णय के खिलाफ थे। नहरों के प्रदेश केरल को 'ईश्वर की धरती' कहा जाता है परंतु बाढ़ के कहर से साहिर लुधियानवी का लिखा गीत याद आता है, 'आसमां पर है खुदा और जमीं पर हम, आजकल वो इस तरफ देखता है कम'। व्यवस्था और मानवीय कमजोरियों के लिए ऊपर वाले को दोष देना हमें सुविधाजनक लगता है। खाकसार अपना योगदान बाढ़ राहत कोष में भेज चुका है और उम्मीद है कि पाठक भी अनुसरण करेंगे।