गुलाबी सपने / कविता भट्ट

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पिंक सिटी जयपुर-रेलवे स्टेशन; ट्रेन तीन घंटे लेट रात साढ़े ग्यारह बजे, भीड़ भरे प्लेटफोर्म पर पहुँची। हाड़ कँपाती सर्दी; अपर्णा थके हुए कदमों से दो भारी बैग लिये, भीतर जाने के लिए बढती है; तभी पीछे से किसी पुरुष का भारी स्वर गूँजता है, "अरे मैडम! जब उठता नहीं तो कपड़ों और मेकअप के सामान वाला भारी बैग लेकर रात को घर से निकलने की क्या ज़रूरत है?" वह उसे धक्का देते हुए आगे बढ़ गया। अपर्णा ने पलटकर देखा कि माथे पर बड़ा-सा टीका लगाये, सफ़ेद कुरता-पायजामा पहने यह वही व्यक्ति है; जो उसके इंटरव्यू में एक्सपर्ट भी था। भीड़ को चीरते हुए; जद्दोजहद के बाद शालिनी भी ट्रेन में बैठी, देखा तो सामने वाली बर्थ पर वही व्यक्ति बैठा है।

अपर्णा बैठी ही थी; कि उसे एक अजनबी नंबर से कॉल आया; रिसीव किया; नेटवर्क प्रॉब्लम के कारण आवाज़ साफ़ न थी; इसलिए उसने स्पीकर ऑन कर दिया। उधर से पुरुष स्वर गूँजा; "हेलो, डॉ अपर्णा जी बोल रही हैं?"

अपर्णा बोली "हाँ, आप कौन?"

उधर से आवाज आयी, "मैडम मैं अजय सिंह बोल रहा हूँ।"

अपर्णा बोली, "मेरा नम्बर कहाँ से मिला?"

उधर से आवाज आई, "इंटरव्यू के कैंडिडेट वाली लिस्ट में से आपका नम्बर लिया; एसिस्टेंट प्रोफेसर के लिए आपका चयन नहीं हुआ; जबकि आप तो पूरा बैग भरकर डिग्रियाँ, अपनी लिखी किताबें, शोधपत्र और भी बहुत कुछ लेकर आई थीं और आपका इंटरव्यू भी बहुत लम्बा चला; लेकिन मेरिट लिस्ट में टॉप पर होने के बावजूद आपकी जगह ऐसे व्यक्ति का चयन हुआ; जो क्वालिफाइड भी नहीं था। मैं उस यूनिवर्सिटी का पुराना छात्र हूँ; भ्रष्टाचार के खिलाफ पिछले पाँच वर्ष से लड़ रहा हूँ; मेरे पास इंटरव्यू के सारे डिटेल तथा भ्रष्टाचारियों की खिलाफ सुबूत हैं, हमारा साथ दीजिए; हम कोर्ट जाएँगे।"

अपर्णा ने भर्राई आवाज में जवाब दिया, "भैया मैं हिमाचल से आई थी; सफलता के बहुत सारे गुलाबी सपने लेकर; किसी तरह ट्रेन के टिकट का इन्तजाम किया?" शालिनी की आँखों से आँसू बह निकले। सामने बैठा व्यक्ति कुटिल मुस्कान के साथ उसे जैसे मुँह चिढा रहा हो। उसे लगा वह फूट फूटकर रो पड़ेगी; किन्तु अपर्णा ने बहुत ही दृढ़ मुस्कान के साथ अपने आँसू पोंछे और बोली, "अजय जी! मैं उतर रही हूँ; मिलकर इनको सबक सिखाएँगे, मुझे नौकरी मिले या न मिले; किन्तु इन का मुखौटा उतारकर, यह रास्ता बनाना है कि यह नौकरी किसी योग्य व्यक्ति को तो मिले।" यह कहकर अपर्णा उस व्यक्ति को घूरकर तीखी दृष्टि से देखा तो वह व्यक्ति सकपका गया; उसके चेहरे पर हवाइयाँ उड़ने लगीं। अपर्णा ट्रेन से उतरने के लिए उठ खडी हुई. ट्रेन से उतरते समय वह फिर उसकी ओर मुड़ी और दृढ़ निश्चय से अपना सिर हिलाया।

गुलाबी सपनों के शहर को छोड़ते हुए ट्रेन धीमी गति से आगे बढ़ चली और अपर्णा फिर से एक संकल्प वाले सपने के साथ पिंक सिटी के उस प्लेटफार्म पर खड़ी होकर; कोई मोबाइल नम्बर मिलाने लगी।

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