छोटी सी बात / तारिक असलम तस्नीम

Gadya Kosh से
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सकीना कॉलेज जाने के लिए तैयार ही हो रही थी कि रेयाज का फोन आ गया। उसने बॉटनिकल गार्डेन में मिलने के लिए बुलाया था। इसलिए, कॉलेज की घंटियां खत्म होते ही गार्डेन जा पहुँची।

दोनों ने गार्डेन के कैफे में नाश्ता किया, फिर इधर-उधर घूमते हुए दुनिया-जहान की बातें करते रहे। उन्हें होश ही नहीं रहा कि कब शाम हो गई और पाँच बच गए।

वह घर पहुँची तो माँ ने आड़े हाथों लिया-- यह घर आने का वक्त है ? तुम पढ़ने जाती हो या नौकरी करने ? मुझे तुम्हारा यह रवैया जरा भी पसंद नहीं है, सकीना। अम्मी गरजीं।

-- आज थोड़ी देर हो गयी अम्मी । रास्ते में रेयाज मिल गया था। उसी के साथ बातचीत में थोड़ी देर हो गयी । बस इतनी सी तो बात है और एक आप हैं कि हल्ला मचाये जा रही हैं।

उसने भी अपनी ओर से हल्की सी नाराज़गी जतायी ।

-- लेकिन तेरा यह तौर-तरीका मुझे पसंद नहीं है, सकीना । जरा सोच तो सही किसी ने साथ देख लिया तो कितनी बदनामी होगी। मुहल्ले में हमारी क्या इज्जत रह जाएगी। लोग तुझ आवारा, बदचलन और न जाने क्या-क्या कहेंगे ? तू समझती क्यों नहीं?

माँ ने समझाने की अथक कोशिश की।

पहले तो सकीना चुप रही, फिर न जाने क्या सुझा, बोली-- अम्मी । मुहल्ले के लड़के चाहे किसी से प्यार करें, किसी से रोमांस करें और साथ घूमे-फिरें। तब किसी की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ता । किसी को कुछ भी गलत दिखाई नहीं देता, लेकिन जब कोई लड़की किसी से प्यार करें या किसी के साथ घूमे-फिरे तो लोग बावेला मचाने लगते हैं। उसे कालगर्ल तक कहने लगते हैं। आखिर औरत भी तो किसी मर्द के साथ ही घूमती है फिर यह दोहरी मानसिकता क्यों?