सामंतवादियों और सितारा पत्नियों की व्यथा-कथा / जयप्रकाश चौकसे

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सामंतवादियों और सितारा पत्नियों की व्यथा-कथा
प्रकाशन तिथि :23 अक्तूबर 2015


'साहब बीबी गुलाम' में अय्याश जमींदार मिलन के लिए आतुर अपनी पत्नी को कहते हैं, 'हवेली की दूसरी पत्नियों की तरह तुम भी गहने बनवाओ और गहने तुड़वाओ!' ऊबभरी जिंदगी जीने वाली सामंतवादी घरों की पत्नियां गहनों के साथ ही दिनभर सरोते से सुपारी काटती रहती और पान चबाती रहती थीं। सामंतवादी घरों की स्रियों की ऊब भरी जिंदगी पर कम ही किताबें लिखी गई हैं। गुरुदत्त की 'साहब बीबी गुलाम' में बड़ी बहु दिनभर स्नान करती और छुआछूत के भय से कांपती रहती थीं। आज के अमीरों और पुराने सामंतवादियों में बहुत से अंतर हैं परंतु स्त्रियों की स्थिति कमोबेश वैसी ही है। वे भी गहने बनवाती और तुड़वाती रहती हैं। ऊब उनकी जिंदगी का भी 'स्थायी' है। सारांश यह कि 'मुखड़ा' दोहराया जा रहा है, 'अंतरों' में कुछ परिवर्तन हुआ है, क्योंकि कुछ अमीरों ने अपनी पत्नियों का मन बहलाने के लिए उन्हें आईपीएल क्रिकेट टीमें खरीदकर दी हैं और वे सत्तर दिन चलने वाले इस क्रिकेट तमाशे में व्यस्त रहती हैं उनके पति राहत की सांस लेते हैं। हमेशा की तरह इन स्त्रियों को रीति-रिवाजों के पालन, उपवास एवं दान धर्म के काम में भी व्यस्त रखा जाता है। प्रकाश झा की मृत्युदंड में एक ऐसी ही स्त्री की व्यथा-कथा थी।

खाप पंचायतों का प्रेम के विरोध का मूल कारण यह है कि प्रेम के उजास से तमाम मठाधीश डरते हैं। स्त्रियों के लिए अनेक प्रपंच रचे गए हैं ताकि वे प्रेम से बची रहें। अब प्रेमहीन विवाहों से कैसी आक्रोश की मुद्रा वाली संतानें जन्मेंगी इसका यथार्थ हम बिना किसी महान उद्‌देश्य और आदर्श के अकारण आक्रोश वाले युवा वर्ग में देख सकते हैं। सबके माथे पर बल हैं, मुटि्ठयां कसी हुई हैं परंतु आदर्शहीन क्रोध में वे स्वयं ही झुलस रहे हैं और हुक्मरान इस ताप पर हाथ सेंक रहे हैं और स्वार्थ की रोटियां सेंक रहे हैं।

सफल सितारों की पत्नियों को भी ऊब डंसती है। उनके पति घंटों शूटिंग में व्यस्त रहते हैं तथा बचा समय विज्ञापन फिल्में करते हैं और प्राय: शूटिंग के लिए विदेश जाते रहते हैं। इन सुपर सितारों के पासपोर्ट पर जो अनेक देशों के ठप्पे लगे हैं, उन्हीं मंे उनकी पत्नियों की ऊब को पढ़ा जा सकता है। विगत कुछ वर्षों से सितारा पत्नियों ने विशेषज्ञों को नौकरी पर रखकर कुछ व्यवसाय किए हैं और उन्हें अपने व्यवसाय की मालकिन होने का गौरव तो प्राप्त है परंतु व्यवसाय तो विशेषज्ञ चला रहे हैं। चेक पर दस्तखत करने के काम से वे खुश हैं। ये सितारा पत्नियां सामंतवादी पत्नियों की तरह गहने बनवाती हैं परंतु तुड़वाती नहीं हैं। नौलखा हारों से सजी-धजी जॉर्जेट-शिफॉन में लिपटी इन सुंदर गुड़ियाओं का जीवन भी गुड़िया की तरह है। इनके दु:ख अजीब हैं कि शूटिंग से लौटा सितारा पति गरम पानी से स्नान के बाद भी अपनी देह से अन्य किसी की गंध दबा नहीं पाता। अत्यंत साफ-सुथरा यह बंदा अजीब ढंग से गंधाता है।

एक सुपर सितारे की पत्नी अपनी आलीशान बंगले में चमचियों की किटी पार्टी आयोजित करती हैं अौर उसकी ये चमचियां उनके नए गहनों की प्रशंसा में कसीदे पढ़ती हैं। आजकल महिला दरबार भी लगते हैं और इनमें भी प्रतिद्वंद्वी सितारे की पत्नी या बहनों की आलोचना की अघोषित प्रतियोगिता चमचयों के बीच होती है। चमचे और चमचियां अमर होते हैं जैसे कॉकरोच पर आणविक विकिरण का प्रभाव नहीं पड़ता, इन पर भी किसी चीज का कोई असर नहीं होता। जेपी दत्ता की 'बंटवारा' में एक दलाल दूसरे से कहता है कि साम्राज्य बदलते रहते हैं परंतु हम दलालों का राज कब होगा। बुजुर्ग दलाल कहता है कि हम तो हर काल खंड में सक्रिय रहे हैं। ठीक इसी भाव का दृश्य 'बंटवारे' के बनने के दशकों पूर्व राज कपूर की 'जिस देश में गंगा बहती है' में युवा डाकू बुजुर्ग डाकू से यही प्रश्न पूछता है और जवाब भी यही है कि हम डाकू हमेशा ही सक्रिय रहे हैं। यह संभव है कि वर्तमान में दलालों, चमचों और डाकुओं का राज ही चल रहा है- यह समाज में व्याप्त असुरक्षा और डर के वातावरण के कारण कहा जा सकता है। स्त्रियां किसी भी आर्थिक वर्ग की हों परंतु ऊब की डोर उन्हें बांधती ही है।

बहरहाल, सामंतवादी दौर की पत्नयों से अलग इन सितारा पत्निों के पास परोक्ष रूप से सत्ता के सूत्र हैं। हाल ही में सफर ब्रैंड फिल्म की तीसरी कड़ी में प्रियंका चोपड़ा को नहीं लिया जा रहा है, क्योंकि विगत दिनों उसके पति और प्रियंका के इश्क के चर्चे थे। आज 'क्वांटिको' की सफलता के बाद विदेश क्षेत्र में प्रियंका की बॉक्स ऑफिस ताकत बढ़ी है। कभी-कभी सितारा पत्नी की बात मान लेता है, क्योंकि धन कमाने की टकसाल बने इस व्यक्ति की मांसपेशियां च्युइंग गम से बनी हैं और एक साथ दर्जनों को पीटने वाला नायक गृहयुद्ध में दुम दबाकर भाग जाता है। दरअसल, हर क्षेत्र के नायकों के पैर कच्ची मिट्‌टी के बने हैं और यह सच अवाम से छिपाया जाता है। 'मिथ ऑफ हीरो' नामक किताब में लोकप्रियता के रसायन पर रोशनी डाली गई है।