सेन्सर बोर्ड की मंजूरी में तर्कहीनता का शिखर / जयप्रकाश चौकसे

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सेन्सर बोर्ड की मंजूरी में तर्कहीनता का शिखर
प्रकाशन तिथि :11 जुलाई 2017


अलंकृति श्रीवास्तव की फिल्म 'लिपस्टिक अंडर द बुर्का' को सेन्सर प्रमाण-पत्र के लिए सात महीने संघर्ष करना पड़ा और सेन्सर का दकियानूसी दृष्टिकोण यह था कि महिला के दृष्टिकोण से घटनाक्रम प्रस्तुत किया गया है गोयाकि पुरुष दृष्टिकोण से प्रस्तुतीकरण होता तो उन्हें आपत्ति नहीं थी। यह तर्कहीनता का शिखर है। इसका अर्थ यह भी हो सकता है कि द्रौपदी के दृष्टिकोण से महाभारत नहीं प्रस्तुत की जा सकती। यूं भी सारे आख्यान पुरुष दृष्टिकोण से ही प्रस्तुत किए गए हैं। दरअसल, पुरुष समाज शारीरिक अंतरंगता के मामले में औरत से सदैव भयभीत रहा है। अगर सभ्यता के पहले चरण में ही यह स्वीकार कर लिया जाता कि शारीरिक अंतरंगता के क्षेत्र में स्त्री पुरुष से कहीं अधिक शक्तिशाली है तो हमारा इतिहास कुछ और ही होता। शायद हम कम हिंसक और अधिक सहनशील होते। संभवत: हृदय प्रेमल भी होता।

अब छोटे परदे की महारानी एकता कपूर इस फिल्म का प्रदर्शन करने जा रही है। एकता को फिल्म विश्वसनीय और मनोरंजक लगी। कथानक में भोपाल की कुछ महिलाएं आपसी बैठक में अपनी इच्छाओं, सपनों और महत्वाकांक्षाओं के बारे में बतियाते हुए निहायत ही साफगोई के साथ पेश होती हैं। कुछ दिन पूर्व ही बल्लि कौर जसवाल का उपन्यास प्रकाशित हुआ है, जिसके नाम से ही उसके कलेवर का अनुमान लगाया जा सकता है 'इरॉटिक स्टोरीज फॉर पंजाबी वीडोज।' संभव है कि प्रकाशन संस्थाएं लेखिकाओं को अधिक महत्व देती हों, क्योंकि सामान्य पाठक भी लेखिका की किताब खरीदना पसंद करता है। यह स्वाभाविक आकर्षण का ही हिस्सा है। अमेरिका में तो लेखक अपने लिए शोध करने वालों को माहवारी वेतन पर रखता है। शोध की सामग्री से लेखक के काम की सामग्री के चयन का अलग विभाग होता है। प्रकाशन होते ही उससे प्रेरित फिल्म की घोषणा होती है,जबकि फिल्मकार प्रथम दिवस से ही 'प्रोजेक्ट' से जुड़ा होता है। अमेरिका ने सृजन क्षेत्र को भी कुशलता से संचालित उद्योग में बदल दिया है। वहां किताब का 'उत्पाद' किया जाता है, जिसके विज्ञापन एवं प्रचार-प्रसार का काम विशेषज्ञों के हाथ में होता है। हमारे शिखर नेता भी अमेरिकी विज्ञापन संस्था से सेवाएं लेते रहे हैं परंतु ऐसी बातें कभी रिकॉर्ड पर नहीं आतीं। ज्ञातव्य है कि आपातकाल के बाद बनी खिचड़ी सरकार ने इंदिरा गांधी पर जांच बिठाई थी और हजारों फाइलों की जांच पड़ताल में कहीं भी इंदिरा गांधी के हस्ताक्षर से किया आदेश-पत्र उन्हें नहीं मिला। आजकल मुख्यमंत्रियों द्वारा दिल्ली भेजी गई फाइलों पर भी कोई हस्ताक्षर नहीं करता। एक गुप्त कोड से रजामंदी या रिजेक्शन की जानकारी मिलती है। इस तरह की अफवाहें प्रचारित हैं। ज्ञातव्य है कि चतुर फिल्मकार राकेश रोशन की फिल्म 'कृष' में शोधकर्ता आकाश गंगा में ओम ध्वनि को भेजता है। 'अोम' के प्रयोग से फिल्मकार धर्मप्रधान दर्शकों से सीधे जुड़ गया। अब वे चाहें तो 'कृषि' की अगली कड़ी में 'तथास्तु' का प्रयोग भी कर सकते हैं अौर राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए दावेदारी सरल हो सकती है। अत: अब दिल्ली से प्रांत को भेजी गई फाइल पर 'ओम' लिखा होने का अर्थ होगा मंजूरी प्राप्त हो गई। विरोधी को जेल भेजने वाली फाइल पर 'तथास्तू' लिखा हो सकता है। हमारे सारे आख्यानों से 'आशीर्वाद' अौर 'श्राप' हटा देने पर कथा अत्यंत संक्षिप्त रह जाती है। रोचकता लाने के लिए किए गए प्रयास का परिणाम यह हुआ कि अवाम रोचकता से मुग्ध होकर असली प्रयोजन को ही भूल गया।

इक्कीस जुलाई को फिल्म का प्रदर्शन होगा और उससे जुड़े विवाद के कारण उसे अधिक दर्शक मिल सकते हैं। दर्शक विवाद के कारण केवल प्रदर्शन के पहले दिन रुचि दिखाता है परंतु फिल्म की सफलता उसके मनोरंजक होने पर ही निर्भर करती है। कथा में निहित कड़वा सच भी मनोरंजन की चीनी में लपेट कर ही दिया जाता है। हमारे यहां स्वाद का बहुत महत्व है। करेले के कड़वे होने के कारण उसे मधुमेह रोगी को सेवन की सलाह दी जाती है। हमारी पाक कला भी हमारे स्वभाव का परिचय देती है। करेले को भी आलू डालकर भरवां कर देते हैं। उसमें कीमा भी डाला जा सकता है। पारसी समुदाय को प्रिय है 'दाल गोश्त।' पाक विधा में प्रयोग की गुंजाइश हमेशा बनी रहती है परंतु अब इस शास्त्र को पढ़ना कोई मायने नहीं रखता। वह िन दूर नहीं जब अापको क्या, कब और क्यों खाना चाहिए इसके भी आदेश जारी होंगे।

बहरहाल, अलंकृति श्रीवास्तव की फिल्म में रत्ना पाठक शाह जैसी निष्णात कलाकार हैं। बुर्का हो या घूंघट इनके नाम से ही पुरुषों में रुचि जाग जाती है। विश्वविख्यात लेखिका सिमॉन द ब्वॉ ने लिखा है कि जब मध्य या गरीब वर्ग की सामान्य स्त्री प्रसाधन के बुर्जुआ साधनों को त्यागकर अपने स्वाभाविक रूप में प्रस्तुत होती है तो मर्दानगी का दावा करने वालों पुरुषों के घुटने भय कांपने लगते हैं।