सौ रुपए का नोट / मनोहर चमोली 'मनु'

Gadya Kosh से
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सयारा देर से सोई। देर से सोई तो देर से उठी। देर से उठी तो हर काम में देरी होती चली गई। वह दौड़ते-दौड़ते स्कूल बस तक पहुँच गई। एक पल की और देरी हो जाती तो बस छूट ही जाती। वह बस में चढ़ी ही थी कि रिहेन बोला-"एक ही सीट बची है। लास्ट वाली। जाओ।" सयारा बस में सबसे पीछे वाली सीट पर बैठ गई।

स्कूल गेट आया। बस रुकी। बच्चे उतरने लगे। सयारा को सबसे बाद में उतरना था। अचानक उसकी नज़र एक सीट के नीचे पड़ी। सीट के नीचे एक सौ रुपए का नोट मुड़ा-तुड़ा नीचे पड़ा था। सयारा ने झट से वह नोट उठा लिया। उसने वह नोट मुट्ठी में बंद कर लिया। सयारा कक्षा में आ पहुँची। पलक झपकते ही उसने नोट अपने स्कूल बैग में रख लिया।

प्रातःकालीन सभा हुई। अब पहला पीरियड गणित का था। सयारा का मन पढ़ाई में नहीं लग रहा था। वह सोच रही थी-'इंटरवल में कोल्ड ड्रिंक्स पिऊंगी। दो समोसे भी खाऊंगी। दो पैकेट चिप्स के भी लूंगी। वैसे तब भी रुपए बच ही जाएंगे। "जैसे-तैसे पहला पीरियड बीता। दूसरा पीरियड हिन्दी का था। लेकिन सयारा तो इंटरवल का इंतज़ार कर रही थी। वह सोचने लगी-" आज तो मज़ा आ गया। सौ रुपए तो बहुत ज़्यादा होते हैं। मुझे दो-तीन दिन घर का टीफीन भी नहीं खाना पड़ेगा। काश! मुझे सौ रुपए हर रोज़ मिल जाते।'

तीसरा पीरियड भी बीत गया। चैथा पीरियड अंग्रेज़ी का था। सयारा सोचने लगी-'बस अब कुछ ही देर में इंटरवल की घंटी बजने वाली है। आज तो भूख कुछ ज़्यादा ही लग रही है।' यह क्या तभी हसन जमाल रोने लगा। क्लाॅस के सारे बच्चे उससे पूछने लगे। हसन जमाल रोते-रोते बोला-"मेरे एक सौ रुपए खो गए। पता नहीं कब जेब से गिर गए। कहाँ गिरे! पता ही नहीं चला। स्कूल की छुट्टी के बाद मुझे बस स्टाॅप पर उतरना था। अम्मी के लिए दवाईयाँ ले जानी थीं। अब्बू भी यहाँ नहीं हैं।"

अक्षरा ने कहा-"स्कूल में रुपए लाना मना है। तुम लाए ही क्यों?" आतिफ ने कहा-"वो बता तो रहा है कि अम्मी के लिए दवाएँ ले जानी थीं। अब क्या होगा?" अंग्रेज़ी की अध्यापिका गुरलीन काॅपियाँ जांच रही थीं। हसन जमाल से पूछा तो उसने सारा किस्सा सुनाया। गुरलीन ने कहा-"कोई बात नहीं। छुट्टी होने पर मुझसे एक सौ रुपए ले जाना। अम्मी को बता देना। जब मन हो मेरे रुपए लौटा देना।"

तभी इंटरवल की घंटी बजी। सयारा ने झट से अपना बैग उठा लिया। अचानक उसे न जाने क्या सूझा। वह गुरलीन से बोली-"मैम। शायद ये एक सौ रुपए हसन जमाल के ही हैं। मुझे मिले थे। ये लीजिए।" किरन ने एक सौ रुपए हसन जमाल को देते हुए कहा-"ये लो। एक सौ रुपए। गुड सयारा। वैरी गुड।" क्लासरूम में तालियाँ बजने लगीं। अगल-बगल की क्लास के बच्चे भी वहाँ आ गए। सब सयारा की ही बात कर रहे थे। दूसरे ही क्षण तालियांे की आवाज़ बढ़ने लगी। सयारा की कुछ सहेलियों ने उसे कंधों में उठा लिया। सब चिल्ला रहे थे-"सयारा। सयारा।"